ब्लॉग को शुरू करने से पहले एक छोटी सी कहानी सुनाना चाहता हूं। कहानी छोटी सी है पर सच्ची है इसलिए पूरा पढ़ना। तो बात मेरे बचपन की है साल 1995- 1996 रहा होगा।
मैं और मेरे ताऊ जी का लड़का, जिसका नाम रमन था। हम स्कूल गए हुए थे। ये छठी कक्षा की बात है। तो हमें स्कूल में पढ़ाया गया कि गाय का पाचन तंत्र कैसे काम करता है और गाय जुगाली क्यों करती है।
जंगल या खुले मैदानों में शिकारियों से बचने के लिए गाय पहले बिना अच्छी तरह चबाए जल्दी-जल्दी बहुत सारा खाना खा लेती है। बाद में, जब गाय सुरक्षित जगह पर आराम से बैठती है तो वह पेट में जमा भोजन को वापस मुंह में लाकर धीरे-धीरे चबाती है, ताकि खाना पूरी तरह से पच सके।
गाय जो घास निगलती है वह सीधे रूमेन में जाता है। यहाँ मौजूद बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीव खाने को थोड़ा तोड़ते हैं जब गाय आराम कर रही होती है तो रेटिकुलम उस आधे पचे हुए भोजन की छोटी-छोटी गोलियाँ बनाकर मांसपेशियों के संकुचन द्वारा वापस गाय के मुंह में भेज देता है।
मुंह में आने के बाद गाय इसे अपनी लार के साथ मिलाकर लंबे समय तक चबाती है। लार भोजन को नरम बनाती है और पेट में एसिड का संतुलन बनाए रखती है। इसे ही जुगाली करना कहते हैं।
ये सब अध्यापकों से सुनने के बाद हम दोनों घर आए और हम अपनी भैंस के पास पहुंच गए। तो हमने हमने देखा कि भैंस जुगाली कर रही थी। हमने उसका मुंह खोला और एक ने मुंह पकड़ा और दूसरे ने उसके मुंह में हाथ डालकर जो कुछ मुहं के अंदर था वो सब कुछ निकाल लिया।
तो हमने देखा कि सच में उसकी जुगाली में घास के टुकड़े थे।
तरमोड़ के डंक से विज्ञान के लार्वा तक: गांव के बच्चे पढ़ाई में पीछे क्यों रह जाते हैं? (Insects Name in Himachali & Hindi)
ये एक बात हो गई दूसरी बात पीली तैतेया से सबंधित है हमें स्कूल में पढ़ाया गया कि ऑर्किड के फूल का पोलिनाशन पीली तैतेया के माध्यम से होता है। इसको याद करने के लिए हमने बहुत रट्टे मारे लेकिन जब परीक्षा का समय आया तो एक ने तैतेया की जगह मैतेया लिख दिया और दूसरे को याद ही नहीं रहा कि लिखना क्या है
अब जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो समझ में आता है कि ऐसा क्यों हुआ। क्यों हम भैंस की जुगाली पर खुद एक्सपेरिमेंट करके समझने जबकि तैतेया के केस में इतना रटने के बाद भी हमें वो याद नहीं रहा।
ऐसा इसलिए हुआ क्यूंकि भैंस की जुगाली करने को हमारे घरों में भी जुगाली करना ही कहा जाता था जबकि तैतेया की अलग अलग प्रजातियों के हमारे गॉव मोहल्ले में अलग अलग नाम थे जैसे पीली तैतेया को हिमाचली में तरमोड और आपिस डोरसाता को हिमाचली में रंगड़ कहा जाता है। अगर इनको इन्ही नामो से पुकारा जाये तो गॉव के बच्चे अध्यापको को सिखाकर आएंगे।
लोग कहते हैं गॉव के बच्चे पढ़ाई में, शहर के बच्चों का मुकाबला नहीं कर सकते लेकिन अगर तरमोड के बीसियों डंक खाकर उनके साथ बड़ा होने वाला बच्चा, बद्रोकों के साथ नदी नालों में खेलकर बड़ा होने बाला बच्चा, अगर मच्छरों के लार्वा के बारे में नहीं बता पा रहा है तो वो हमारी शिक्षा प्रणाली की कमी है इसमें बच्चों को दोष देना बंद कीजिये।
इसी चीज़ ने मुझे ये ब्लॉग लिखने ले लिए प्रेरित किया।
कीड़ों के नाम हिंदी, अंग्रेजी और हिमाचली में: Insects Name in Hindi, English & Himachali (Insects List)
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| इंग्लिस नाम | हिंदी नाम | हिमाचली नाम | Hinglish |
| Earthworm | केंचुआ | संगलोआ | kenchuaa |
| yellow Yellowjacket Wasp | पीली तैतेया | तरमोड | peeli taiteya |
| Mud Wasp | कुम्हारी ततैया | कुम्भी | kuhari taiteya |
| Hornet | भिरंड | रंगड़ | bhirand |
| Dung Beetle | गोबर भृंग | भूंड | gobar bhring |
| Mosquito | मच्छर | मच्छर | machhar |
| Housefly | मक्खी | माखी | makhi |
| Cockroach | तिलचट्टा | डलक | tilchatta |
| Ant | चींटी | मकोड़ी | cheenti |
| Spider | मकड़ी | कणा | makadi |
| Lizard | छिपकली | घनाकड़ी | chhipkali |
| Centipede | कनखजूरा | घमारु | kankhjura |
| Caterpillar | इल्ली | सुंडी | illi |
| Snail | घोंघा | फिल | ghongha |
| Termites | दीमक | सींक | deemak |
| Scorpion | बिच्छू | डंगू | bichhu |
| Firefly | जुगनू | जुगनू | jugnu |
| Head Louse / Lice | जूँ | जूँ | juun |
| Flea | पिसू | मोंगन | pishu |
| Tick | किलनी | चिचड़ | kilni |
| Grasshoppe | झिंगुर | टिड्डी | jhingur |
| Dragonfly | ब्याह धैया | पताजु | vyaah dhaiya |
| Mosquito Larva | लारवा | बदरोक | larva |
| Myna | मैना | घटारी | maina |

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