
क्यों हम आज भी वो कर रहे हैं, जिसका कारण इतिहास खुद भूल चुका है
वो चीज़ें जो किसी समय, उस समय की जरुरत से शुरू हुई थी पर आज वो एक परम्परा एक रीति रिवाज बन चुकी हैं। उनको बनाने वाले चले गए लेकिन उनकी अगली पीडियां बिना मतलब के उनको ढो रही हैं। आइये ऐसी कुछ परम्पराओं के बारे में बात करते हैं। जन्मदिन पर मोमबत्तियां बुझाना आजकल जब पश्चिमी पद्धति में जन्मदिन









