हिमाचल प्रदेश में नाथ और सिद्धों के बहुत से स्थान हैं जहाँ पर लोग बड़ी श्रद्धा भाव से माथा टेकते हैं। वैसा ही एक पवित्र स्थान है नगरोटा बगवां का मछिंदर महादेव जो मूमता गांव के अंतर्गत आता है । काँगड़ा से जब आप नगरोटा बगवां की तरफ आते हैं तो रास्ते में बड़ोह चौंक पड़ता है।
ये नगरोटा बगवां से लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर पीछे है यहाँ से लगभग 300 मीटर की दुरी पर बड़ाई बस स्टॉप है यहीं से मूमता गांव (मछिंदर महादेव) का लिंक रोड सीधा मंदिर परिसर और सरोवर की तरफ जाता है।
मछिंदर महादेव का इतिहास और धार्मिक रहस्य
इस मंदिर का मुख्य संबंध नाथ संप्रदाय के महान संत गुरु मछिंद्रनाथ (मत्स्येन्द्रनाथ) से है जिन्हे भगवान शिव का अवतार माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु मछिंद्रनाथ जी ने इस पावन स्थान पर स्थित सरोवर के पास भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी।
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उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यहाँ उन्हें दर्शन दिए थे। इसी कारण इस स्थान का नाम ‘मछिंद्र महादेव’ पड़ा जो समय के साथ स्थानीय बोली में ‘मछली महादेव’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
मछिंदर महादेव को लेकर स्थानीय मान्यताएं
स्थानीय लोगो के अनुसार पहले समय में किसी के घर में कोई विवाह या अन्य समारोह होता था तो पहले निमत्रण इसी मंदिर में दिया जाता था। निमंत्रण देने के अगले दिन जब लोग इस मंदिर में पहुँचते थे तो समारोह के लिए खाना बनाने के सारे बर्तन उपलब्ध हो जाते थे।
जो समारोह के बाद यहीं पर लौटा दिए जाते थे परन्तु एक बार किसी ने चालाकी से बर्तन अपने पास रख लिए और फिर बर्तन मिलना बंद हो गए।
पवित्र सरोवर और मछलियों का रहस्य
इस सरोवर में हजारों की संख्या में छोटी-बड़ी मछलियां तैरती हैं। इन मछलियों को भगवान शिव और गुरु मछिंद्रनाथ का आशीर्वाद प्राप्त माना जाता है।
मंदिर आने वाले श्रद्धालु सरोवर में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाते हैं। माना जाता है कि मछलियों को भोजन कराने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

क्या सच में यहाँ मछलियों को सोने की नथ पहनाई जाती है?
स्थानीय लोगों और पुराने श्रद्धालुओं का ऐसा अटूट विश्वास है कि जब किसी भक्त की कोई खास मनोकामना या मन्नत पूरी होती है तो वे भगवान शिव का शुक्रिया अदा करने के लिए मंदिर आते हैं।
मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु सरोवर की बड़ी मछलियों को सम्मान के रूप में सोने या चांदी की नथ पहनाते हैं। हैरानी की बात यह है कि खुले सरोवर में तैरने वाली इन मछलियों पर इतने कीमती आभूषण होने के बावजूद कोई इन्हें चुराने या नुकसान पहुँचाने की हिम्मत नहीं करता।
मंदिर का प्राकृतिक सौंदर्य
मंदिर के एक ओर सफेद शिखर वाला सुंदर शिवालय है और दूसरी ओर स्वच्छ पानी का तालाब जिसमें हरी-भरी पहाड़ियों और बर्फ से ढकी धौलाधार पहाड़ियों का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। सुबह और शाम के समय यहां का वातावरण बहुत ही शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होता है।
इस मंदिर के साथ ही शनि देव मंदिर और संतोषी माता का मंदिर है। मंदिर के पास आम का बगीचा और एक प्राथमिक स्कूल भी है। ब्लॉगिंग और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह काफी शानदार है।
मछिंदर महादेव कैसे पहुंचे?
मछली महादेव मंदिर पहुंचने के लिए परिवहन के सभी साधन आसानी से उपलब्ध हैं:
हवाई मार्ग
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा गग्गल (कांगड़ा एयरपोर्ट) है, जो लगभग 20 किमी दूर है।
रेल मार्ग
कांगड़ा वैली टॉय ट्रेन के जरिए नगरोटा बगवां रेलवे स्टेशन तक पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग
धर्मशाला, कांगड़ा और पालमपुर से नगरोटा बगवां के लिए नियमित बसें और टैक्सी मिलती हैं। नगरोटा मुख्य बाजार से मूमता गांव केवल 10 मिनट की दूरी पर है।
यात्रियों के लिए खास टिप्स
सुबह या शाम के समय जाएं, ताकि धौलाधार पहाड़ियों का साफ नजारा मिल सके और मछलियों को दाना देने का सही अनुभव हो। मंदिर के पास या रास्ते से आप मछलियों के लिए आटे की गोलियां ले सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
अगर आप कांगड़ा घाटी की यात्रा कर रहे हैं और चामुंडा देवी, ज्वालाजी या धर्मशाला जा रहे हैं, तो मछिंदर महादेव (नगरोटा बगवां) को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। यह स्थान भक्ति, शांति और प्राकृतिक सुंदरता का एक अनोखा संगम है।
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FAQ
मछिंदर महादेव मंदिर कहां स्थित है?
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में नगरोटा बगवां तहसील के मूमता गांव में स्थित है।
क्या मछिंदर महादेव सरोवर से मछली पकड़ सकते हैं?
नहीं, यहां की मछलियों को पवित्र माना जाता है और उन्हें पकड़ना या नुकसान पहुंचाना पूरी तरह से वर्जित है
यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन सा है?
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय यहां के मौसम के हिसाब से सबसे बेहतरीन रहता है।