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रोमन सभ्यता – उतार चढ़ाव से भरा इतिहास का एक शक्तिशाली अध्याय

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अंग्रेजी में एक कहावत है Rome was not built in a day. इस कहावत का वास्तविक अर्थ है कि हथेली पर सरसों नहीं जमती अर्थात बड़ी और महत्वपूर्ण चीज़ों को होने में समय लगता है इसलिए धैर्य रखें।

अगर इसका हिंदी में अनुवाद किया जाये तो इसका अर्थ बनता है “रोम एक दिन में नहीं बना था”। ये लाइन रोम की सभ्यता के बारे में जानने की जागरूकता पैदा करती है। सच में रोम जैसा शक्तिशाली और महत्वपूर्ण शहर एक दिन में नहीं बना होगा।

रोम की सभ्यता के बारे में जानने के लिए हमें कुछ चीज़ें जो यहाँ पर बार बार इस्तेमाल होगीं उनके बारे में जानना जरुरी है।

प्रायद्वीप (peninsula) :- प्रायद्वीप भूमि के उस भाग को कहते हैं जो एक तरफ से भूमि से जुड़ा होता है और बाकि तीनो तरफ से पानी से घिरा होता है।

रोमन सीनेट :- सीनेट, उस समय के समझदार और सीनियर लोगों की एक सभा होती थी जिसके द्वारा राजा बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय लेता था।

रोमन कौंसल :- रोमन कौंसल, रोमन राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचित अधिकारी होता था । रोमन राज्य में 2 कौंसल होते थे जो एक साल के लिए सत्ता में रहते थे।

एशिया माइनर :- यह एशिया महाद्वीप का एक प्रायद्वीप है जो यूरोप को एशिया से अलग करता है। पहले ही बताया है कि प्रायद्वीप भूमि के उस भाग को कहते हैं जो एक तरफ से भूमि से जुड़ा होता है और बाकि तीनो तरफ से पानी से घिरा होता है। एशिया माइनर आधुनिक तुर्की के मध्य भाग में स्थित है।

पाषाण काल या स्टोन ऐज :- पाषाण काल मानव इतिहास का सबसे पुराना काल है जिसमे मानव पत्थर से बने औजारों का इस्तेमाल करता था।

इटली जिसकी राजधानी रोम है उसका आरम्भिक इतिहास

रोमन सभ्यता का केंद्र इटली था, वह प्रायद्वीप (peninsula) जो ग्रीस के पश्चिम में भूमध्य सागर में फैला हुआ है। टाइबर नदी, जिस पर रोम शहर स्थित है, प्रायद्वीप के मध्य भाग से होकर बहती है।

इटली का इतिहास पाषाण काल से आरम्भ होता है। 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व जो इतिहास प्राप्त होता है उससे इटली के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है। रोमन से पहले इटली में बहुत सारे आदिवासी समुदाय थे जिनकी भाषा और संस्कृति अलग अलग थी।

सभी सभ्यताओं की तरह रोमन इतिहास की जानकारी वहाँ की लोक कथाओं के माध्यम से मिलती है। उन्होंने एक कहानी गढ़ी है कि रोमुलस और रीमस जब छोटे थे तो वो मौत के मुँह से बच निकले और रोम शहर की स्थापना की।

लेकिन एक कब्र की खुदाई से पता चलता है कि रोम शहर की स्थापना लगभग 1000 ईसा पूर्व रोमुलस ने लैटियम जिले में की थी। प्राचीन रोमनों की भाषा लैटिन को इसका नाम लैटियम से मिला है।

रोम में गणतंत्र की शुरुआत

शुरुआती समय में, रोमनों में एक राजा, एक सभा और एक सीनेट होती थी।

लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व के अंत तक राजाशाही शासन को उखाड़ फेंका गया और एक गणतंत्र की स्थापना की गई। एक गणतंत्र के रूप में रोमनों ने प्रायद्वीप के अन्य हिस्सों पर भी विजय प्राप्त कर ली।

तथा 265 ईसा पूर्व तक रोमनों ने पूरे इटली को अपने नियंत्रण में ले लिया। रोमन गणराज्य की राजनीतिक व्यवस्था में दो कौंसल, सीनेट और असेंबली शामिल थे।

रोम- कार्थेज युद्ध या प्यूनिक युद्ध (264 ईसा पूर्व से 146 ईसा पूर्व )

रोमन, अफ़्रीका के उत्तरी तट पर स्थित कार्थेज शहर के साथ युद्धों की एक श्रृंखला में शामिल थे। रोमनों को डर था कि कार्थाजियन कहीं सिसिली पर कब्जा न कर लें इसी खतरे ने रोमनों को कार्थेज पर हमला करने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद हुए रोम- कार्थेज युद्ध, जिन्हें प्यूनिक युद्ध के नाम से जाना जाता है, ये युद्ध 264 ईसा पूर्व से 146 ईसा पूर्व तक चले। वास्तव में इस दौरान 3 युद्ध हुए थे पहला प्यूनिक युद्ध 264 से 241 ई.पू. तक , दूसरा 218 से 201 ई.पू तक , तथा तीसरा प्यूनिक युद्ध149 से 146 ईसा पूर्व तक लड़ा गया था इन युद्धों में कार्थागिनियों की हार हुई थी।

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रोम एक गणराज्य के रूप में

पहली शताब्दी ईसा पूर्व की शुरुआत तक रोमन ने ग्रीस और एशिया माइनर पर विजय प्राप्त कर ली थी और मिस्र पर एक संरक्षित राज्य स्थापित कर लिया था।

एजियन सागर, ग्रीस और एशिया माइनर को अलग करता है।

रोमन गणराज्य के समय उनके दो जनरलों, पोम्पी द ग्रेट और जूलियस सीज़र के बीच सत्ता के लिए प्रतिद्वंद्विता बढ़ी। उनके बीच युद्ध हुआ और पोम्पी की मिस्र में उसके दुश्मनों द्वारा हत्या कर दी गई।

जूलियस सीज़र, मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा की मनमोहक सुंदरता से आकर्षित होकर कुछ समय तक मिस्र में ही रहा। रानी क्लियोपेट्रा और सीज़र के निजी सबंधो से सीज़ेरियन पैदा हुआ। उसके बाद 46 ईसा पूर्व में जब वो रोम लौटा तो उसने खुद को तानाशाह बना लिया।

हालाँकि उस समय रोम एक गणतंत्र के रूप में कार्य करता था इसलिए सीनेट द्वारा जूलियस सीज़र पर ये आरोप लगाया गया कि वो राजा बनने का इरादा रखता था और 44 ईसा पूर्व में सीनेट की एक बैठक में उसकी हत्या कर दी गई।

रोमन सभ्यता - उतार चढ़ाव से भरा इतिहास का एक शक्तिशाली अध्याय

सीज़र की हत्या की साजिश में शामिल नेता, ब्रूटस और कैसियस वहाँ से भाग गए और उन्होंने एक बड़ी सेना का संगठन कर लिया था लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया और मार दिया गया।

सीज़र की हत्या के बाद सत्ता सीज़र के दोस्त मार्क एंटनी, लैपिडस और सीज़र के दत्तक पुत्र (ऑक्टेवियन) के हाथों में चली गई। लैपिडस एक शराबी था इसलिए सत्ता की लड़ाई मुख्यत: मार्क एंटनी और ऑक्टेवियन के बीच हुई।

सीज़र के दोस्त मार्क एंटनी और मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा के बीच प्रेम सबंध स्थापित हुए थे जिससे 3 बच्चों का जन्म हुआ। एक्टियम की लड़ाई में ऑक्टेवियन की सेनाओं ने एंटनी और क्लियोपेट्रा के नौसैनिक बेड़े को हरा दिया जिससे दोनों ने अलग अलग समय पर आत्महत्या कर ली।

37 ईसा पूर्व में ऑक्टेवियन (जो कि जूलियस सीज़र का दत्तक पुत्र था कुछ इतिहासकार ऑक्टेवियन को जूलियस सीज़र के भाई का पोता भी मानते हैं ), रोमन साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बन गया।

और उन्होंने ऑगस्टस इम्पीरेटर की उपाधि के तहत 44 वर्षों तक शासन किया, जिसका अर्थ है ‘पवित्र विजयी-जनरल।’ उन्होंने स्वयं को “प्रिंसेप्स” भी कहा जिसका मतलब होता है “राज्य का प्रथम नागरिक” ।

उसके शासनकाल से लेकर 284 ई. तक के रोमन इतिहास के काल को ‘प्रिंसिपेट’ कहा जाता है। ये समय रोमन इतिहास का सबसे शांतिपूर्ण समय था और इतिहास में इस समय को पैक्स रोमाना के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘रोमन शांति‘।

284 ई. में डायोक्लेटियन शासक बना। इस समय से रोमन सभ्यता का और अधिक तेजी से पतन हुआ। डायोक्लेक्टियन के उत्तराधिकारियों में से एक, कॉन्स्टेंटाइन ने 330 ईस्वी में प्राचीन बीजान्टियम की साइट पर कॉन्स्टेंटिनोपोल नामक एक नई राजधानी का निर्माण किया।

कुछ ही समय बाद, रोमन साम्राज्य पश्चिमी और पूर्वी दो साम्राज्यों में विभाजित हो गया। पश्चिमी भाग शीघ्र ही कई टुकड़ों में टूट गया। लेकिन पूर्वी भाग, जिसे बीजान्टिन साम्राज्य कहा जाता है, एक हजार साल तक जारी रहा।

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उत्तरी आक्रमणकारियों के रूप में जर्मन जनजातियाँ ने रोमनों पर अंतिम प्रहार किया और इस प्रकार 476 ई. तक, एक समय के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य, रोमन साम्राज्य के पश्चिमी भाग का अंत हो गया।

और 1453 ईस्वी में, पूर्वी भाग जिसे बीजान्टिन साम्राज्य के नाम से जाना जाता है , उसका भी अंत हो गया।

रोमन लोगों के देवी देवता कौन थे

रोमन लोग भी उतने ही देवी-देवताओं की पूजा करते थे जितने कि यूनानी और भारतीय ।

जेनस :- बर्ष के महीने का पहला नाम जनवरी रोमन देवता जेनस के नाम पर ही रखा गया है।

जुपिटर (बृहस्पति):- रोमन देवी देवताओं का राजा था जैसे भारत में इंद्र को देवताओं का राजा समझा जाता था।

Mars (मंगल) :- युद्ध का देवता था।

Neptune (वरुण) :- समुद्र का देवता माना जाता था।

Venus (शुक्र ) :- सौंदर्य एवं प्रजनन की देवी थीं।

Juno (जूनो) :- ये जुपिटर की पत्नी थी और महिलाओं की सरंक्षक थी।

रोमन सभ्यता का योगदान

रोमन कानून और शासन के सिद्धांत दुनिया के लिए रोम का सबसे बड़ा योगदान हैं।

साम्राज्य के सभी हिस्सों को जोड़ने वाली रोम की सड़क प्रणाली इतनी संपूर्ण थी कि लोग कह सकते थे ‘सभी सड़कें रोम की ओर जाती हैं’। वैसे तो इस कहावत का अर्थ होता है कि एक ही लक्ष्य को पाने के कई तरीके होते हैं।

परन्तु ये कहावत रोमन साम्राज्य के समय की विशाल सड़कों के बारे में भी बहुत कुछ बताती है।

रोमन ने अपनी वर्णमाला विकसित की और लैटिन भाषा पश्चिमी यूरोप के सभी शिक्षित लोगों की भाषा बन गई। लैटिन शब्द अभी भी विज्ञान में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं, और लैटिन कई यूरोपीय भाषाओं का आधार है – विशेष रूप से। फ़्रेंच, स्पैनिश और इतालवी।

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ल्यूक्रेटियस, सिसरो, मार्कस ऑरेलियस और सेनेका प्रसिद्ध रोमन दार्शनिक थे।

होरेस (‘ओडेस’) और वर्जिल (‘एनीड’) प्रसिद्ध रोमन कवि थे।

टैसीटस (‘एनल्स’ और ‘हिस्ट्रीज़’) सबसे प्रसिद्ध रोमन इतिहासकार थे और प्लिनी और द एल्डर अन्य प्रसिद्ध रोमन इतिहासकार थे।

रोमन कंक्रीट के आविष्कारक थे और ईंटों और पत्थरों को मजबूती से एक साथ जोड़ सकते थे। उन्होंने दो वास्तुशिल्प सुधार – मेहराब और गुंबद भी पेश किए।

ग्लेडियेटर्स के बीच या ग्लैडीएटर और जंगली जानवर के बीच लड़ाई, एक लोकप्रिय रोमन मनोरंजन था। इन प्रतियोगिताओं के लिए विशेष अखाड़े या एम्फीथिएटर बनाये गये। महानतम अखाड़ों में से एक कोलोसियम के खंडहर रोम में देखे जा सकते हैं।

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