वो चीज़ें जो किसी समय, उस समय की जरुरत से शुरू हुई थी पर आज वो एक परम्परा एक रीति रिवाज बन चुकी हैं। उनको बनाने वाले चले गए लेकिन उनकी अगली पीडियां बिना मतलब के उनको ढो रही हैं।
आइये ऐसी कुछ परम्पराओं के बारे में बात करते हैं।
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Toggleजन्मदिन पर मोमबत्तियां बुझाना
आजकल जब पश्चिमी पद्धति में जन्मदिन मनाया जाता है तो पहले मोमबत्तियां बुझाई जाती है परन्तु क्या हम ये जानते हैं कि लोगों ने ऐसा करना कब शुरू किया था।
ये परम्परा प्राचीन यूनानियों ने शुरू की थी।
वो जन्मदिन के दिन अपनी देवी आर्टेमिस के मंदिर में चमकता हुआ केक ले जाते थे। केक पर मोमबत्तियाँ जला कर उनको बुझाते थे उनका मानना था कि मोमबत्ती बुझाने से जो धुआँ निकलता है वो उनकी प्रार्थना को सीधे देवताओं तक पहुँचाता है।
कोट के बाजु पर लगे बिना मतलब के बटन की परम्परा
अक्सर आपने देखा होगा के किसी भी कोट के दोनों बाजुओं पर बटन लगे होते हैं और जिनका कोई इस्तेमाल भी नहीं होता। ये परम्परा नेपोलियन बोनापार्ट ने शुरू की थी।
नेपोलियन बोनापार्ट ने पहली बार अपनी सेना के कोट के बाजु पर बटन लगाना शुरू किया था ताकि सैनिक अपनी बाजु से अपने नाक न पोंछ सके और उनकी बर्दी साफ़ रहे। बाद में धीरे धीरे ये फैशन बन गया।
ईसाई लड़कियों के द्वारा शादी के समय सफ़ेद कपडे पहनना
आजकल ईसाई शादियों में लड़कियों का सफ़ेद गाउन पहनना एक परम्परा है। परन्तु पहले ईसाईयों में शादी के लिए सबसे अच्छी पोशाक, रंगीन पोशाक ही मानी जाती थी।
परन्तु जब ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया ने 1840 में अपनी शादी पर सफ़ेद रेशमी गाउन पहना तो ऐसा करना एक स्टेटस सिम्बल बन गया।
जजों के द्वारा काला कोट पहनना
अदालत में जजों और बकीलों के द्वारा काला कोट पहनना एक दुखद घटना से शुरू हुआ था। 1694 में जब महारानी मैरी की मृत्यु हो गई। तो उनके शोक में जजों और बकीलों ने काले रंग के कोट पहने। परन्तु उनकी मृत्यु का शोक इतना लम्बा चला कि जजों को ये ड्रेस पसंद आ गई और बाद में उन्होंने इसे न्याय की पहचान मानकर हमेशा के लिए अपना लिया।
लड़कियों की शर्ट के बटन का बाईं तरफ तथा लड़कों की शर्ट के बटन का दाईं तरफ होना
अक्सर हम देखते हैं कि लड़कों की शर्ट के बटन लड़को के उलटी तरफ यानि बाईं तरफ होते है ऐसा लड़कियों की शर्ट को अलग से दिखाने के लिए नहीं होता बल्कि ये किस्सा भी पुराने समय की एक जरुरत से जुड़ा है।
पुराने समय में केवल अमीर महिलाएं ही अच्छे कपडे पहनती थी। वो अपने कपडे खुद नहीं पहनती थी बल्कि उनकी नौकरानियां उन्हें कपडे पहनाती थी। क्यूंकि अधिकतर लोग आम कामकाज के लिए दाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं।
इसलिए नौकरानियों की सहूलियत के लिए ये बटन बाईं तरफ लगाए गए ताकि वो आसानी से तथा अच्छे से बटन बंद कर सकें।
ओके (O.K) का आम बोल चल में इस्तेमाल होना
ओके शब्द की तारें अमेरिकी गृह युद्ध से जुड़ी हुई हैं अमेरिकी गृह युद्ध जो 12 अप्रैल, 1861 से लेकर 26 मई, 1865 तक लड़ा गया था ये उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिकी राज्यों के बीच लड़ा गया था जिसमे लगभग 8,50,000 लोग मारे गए थे।
इस गृह युद्ध के दौरान जब किसी दिन कोई भी व्यक्ति नहीं मारा जाता था तो वो (0 killed – जीरो killed) कोई मारा नहीं गया कहते थे। ये 0-killed बाद में ओके बन गया।
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