पंजाब में इस समय 1000 से अधिक डेरे कार्यरत हैं बल्कि इंडियन एक्सप्रेस की 28 जनवरी 2012 की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में छोटे बड़े कुल मिलाकर 9000 डेरे कार्यरत हैं जिनमे से 250 बड़े डेरे हैं इनमे से कुछ डेरे जैसे नाथ, जोगी और सिद्ध ये तो सिख धर्म से भी पुराने हैं।
Table of Contents
Toggleपंजाब के डेरों में कुछ मुख्य डेरे हैं
- डेरा सच्चा सौदा
- निरंकारी समुदाय
- राधा स्वामी डेरा ब्यास
- डेरा दिव्य ज्योति जागृति संस्थान
- निर्मल कुटिया पटियाला
- सचखंड बल्लां जालंधर
- डेरा हंसली अमृतसर
अभी हाल ही में 2 सितम्बर 2024 को डेरा, राधा स्वामी व्यास चर्चा में आया था जब जसदीप सिंह गिल, डेरा राधा स्वामी व्यास के नए प्रमुख बने उन्होंने बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों की जगह कार्यभार संभाला।
पंजाब के इन सब डेरों की अपनी एक अलग संस्कृति और सबके अपने अपने नियम और कानून हैं जिनके तहत इनके डेरा प्रमुख अपने डेरों को चलाते हैं। जो भी व्यक्ति जिस डेरे का अनुयायी होता है वो अपने ही डेरे को सर्वश्रेष्ठ मानता है।
बिलकुल उसी तरह जैसे किसी हिन्दू घर में पैदा हुआ व्यक्ति हिन्दू धर्म को, मुस्लिम घर में पैदा हुआ व्यक्ति इस्लाम को, ईसाई घर में पैदा हुआ व्यक्ति ईसाई धर्म को तथा एक सिख घर में पैदा हुआ व्यक्ति सिख धर्म को श्रेष्ठ मानता है जबकि उस घर में पैदा होना कभी उसके अपने हाथ में नहीं होता।
इन सब डेरों के नियम अलग हैं, धारणाएं अलग हैं तथा मान्यताएं अलग-अलग हैं जैसे कई डेरों में मांस खाने को गलत नहीं समझा जाता है जबकि कई डेरों में माँस खाना वर्जित है। कुछ डेरों में गृहस्त लोगों द्वारा अपनी पत्नी के पैर छूने को प्रोत्साहित किया जाता है।
इन डेरों के अलग नियम, अलग धारणाएं और अलग मान्यताएं होने के बाबजूद इन सब मे एक ऐसी प्रथा है जो सब डेरों में समान रूप से निभाई जाती है और वो है नाम दान की प्रथा।
नाम दान देने के तरीके सब डेरों में अलग अलग हो सकते हैं परन्तु पंजाब के लगभग हर डेरे में नाम दान जरूर दिया जाता है।
डेरा समुदाय में नाम दान क्यों जरुरी है
डेरा समुदाय का नाम दान और किसी नवजात बच्चे के जन्म का पंजीकरण एक जैसे ही होते हैं क्यूंकि जब कोई व्यक्ति किसी डेरे में शामिल होता है तो वहाँ पर उसका नया जन्म ही होता है इसलिए पहले हम जन्म का पंजीकरण क्यों जरुरी है इस पर बात कर लेते हैं। फिर नाम दान को समझना आसान हो जायेगा
क्या होता है जन्म पंजीकरण
भारत में जन्म पंजीकरण कराना अनिवार्य है। जन्म के 21 दिनों के भीतर बच्चे का जन्म का पंजीकरण कराना जरुरी होता है। अगर 21 दिनों के अंदर जन्म पंजीकरण नहीं होता तो ये पुलिस वेरिफिकेशन के साथ होता है।
सरकार के लिए जन्म पंजीकरण इतना आवश्यक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ग्राम पंचायत स्तर पर भी सरकार ऐसे कार्यों के लिए पंचायत सेक्रेटरी की नियुक्ति करती है जिसके पास उस पूरी पंचायत का डेटा सुरक्षित होता है।
बच्चे के जन्म का पंजीकरण करने से सरकार को क्या लाभ होता है
जनसांख्यिकीय डेटा:– जन्म पंजीकरण सरकार को जनसंख्या के आकार, वृद्धि दर और संरचना का सटीक डेटा प्रदान करता है।
पहचान और नागरिकता:– जन्म पंजीकरण एक व्यक्ति की कानूनी पहचान और नागरिकता स्थापित करने में मदद करता है।
बाल श्रम की रोकथाम:- जन्म पंजीकरण बच्चों को बाल श्रम अन्य शोषण से बचाने में मदद करता है। यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से सुरक्षा और देखभाल मिले।
स्वास्थ्य कार्यक्रमों की योजना:- जन्म पंजीकरण सरकार को टीकाकरण कार्यक्रमों, पोषण कार्यक्रमों, और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक सुरक्षा:- जन्म पंजीकरण व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा लाभों, जैसे कि पेंशन और बीमा, तक पहुंचने में मदद करता है।
डेरा समुदाय में नाम दान कैसे दिया जाता है
जब भी कोई व्यक्ति किसी डेरा समुदाय से प्रभावित होता है (ये मुख्यत: तब होता है जब उसका कोई अपना रिस्तेदार या परिचित किसी डेरे से जुड़ा होता है)
तो वो डेरे के सत्संग में नियमित रूप से भाग लेना शुरू करता है उस डेरा समुदाय की प्रमुख जगहों, जहाँ पर ये नाम दान की प्रक्रिया होती है वहाँ पर भी वो नियमित रूप से जाना शुरू करता है।
फिर एक निश्चित समय के बाद जब उसे लगता है कि वो नाम दान लेने के लिए तयैर है तो वो अपने क्षेत्र के सेक्रेट्री से संपर्क करता है।
सेक्रेटरी आमतौर पर वो व्यक्ति होता है जो पहले नाम दान ले चुका होता है और अपने क्षेत्र में उस डेरा समुदाय की किसी भी गतिबिधि जैसे लोगों को इक्कठा करके मुख्य सेंटर में ले जाना इत्यादि के लिए जिम्मेबार होता है।

किस स्थान या किस राज्य के लोगो को किस समय नाम दान दिया जायेगा ये पहले से तय होता है और क्षेत्र के अनुसार लोगो को समय दिया जाता है

मुख्य सेंटर, जहाँ अधिकतर ये नाम दान की प्रक्रिया सम्पन्न होती है, वहाँ पर दिए गए समय और तिथि पर पहुँचने के बाद नाम दान लेने वाले लोगों को आम संगत से अलग कर दिया जाता है और उनको अलग शेड में ले जाया जाता है।
फिर उस डेरा समुदाय के चुने लोग अलग अलग तरीके से इन लोगों से सवाल पूछते हैं ये एक इंटरव्यू के जैसा होता है जिसमे 4-5 लोग अलग अलग समय पर इन लोगो को अलग अलग ले जाकर इनसे प्रश्न पूछते हैं ।
डेरा समुदाय के प्रश्नो में मुख्य तौर पर जो प्रश्न होते हैं वो हैं
- आपने कितनी बार सत्संग सुना
- आपने कौन से दिन संत्संग सुना
- बाबा जी (डेरा प्रमुख) साल के किस दिन सेंटर में आते हैं
- आप मांस तो नहीं खाते अगर पहले खाते थे तो कितने समय से छोड़ा हुआ है।
- जो NRI लोग भारत से बाहर से डेरों में शामिल होने के लिए आते हैं उनसे अलग तरह के सवाल पूछे जाते हैं।
साथ ही अपने प्रश्न पूछते समय ये अच्छी तरह से यकीन कर लिया जाता है कि डेरे में शामिल होने वाला व्यक्ति डेरा प्रमुख में पूर्ण आस्था रखता हो ताकि वो समुदाय में शामिल होकर वहां के माहौल को ख़राब न कर सके।
इसके बाद पूरी तरह से इत्मीनान करने के बाद जिसको समुदाय में शामिल करना होता है उसको I-Card (पहचान पत्र) दिए जाते हैं और उनको अलग से बैठा दिया जाता है।
फिर उनके कानो में गुरुमंत्र बोला जाता है और गुरु जी (डेरा प्रमुख) द्वारा नाम दान लेने वाले लोगों को जलजीरा पिलाया जाता है।
इनकी रेसिस्टर में एंट्री होती है जिसमे उनका नाम, पता तथा टेलीफोन नंबर आदि लिखा जाता है । ये वाली रस्म कुछ-कुछ पाहुल प्रथा की तरह सम्पूर्ण की जाती है ।
राधा स्वामी गुरु दीक्षा के पांच नाम क्या हैं।Radha soami Naam daan 5 words
डेरा राधा स्वामी व्यास, गुरु दीक्षा के पांच नाम हैं
- ओंकार
- ररंकार
- ज्योति निरंजन
- सोहंग
- सतनाम
डेरा समुदाय में नाम दान क्यों जरुरी है
किसी भी डेरे के कितने अनुयायी है ये सब जानने के लिए नाम दान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्यूंकि नाम दान लेने वाले व्यक्तियों का पूरा रिकॉर्ड उस संस्था के पास होता है।
यहाँ तक कि नाम दान लेने के बाद ही व्यक्ति उस डेरे में काम कर सकता है जिसे सेवा कहा जाता है। कई डेरों के अनुयायी ये मानते हैं कि मरने के बाद कुछ साथ नहीं जायेगा ये सेवा ही साथ जाएगी।
डेरों में सेवा देने के लिए केवल नाम दान प्राप्त व्यक्तियों की ही ड्यूटी लगाई जाती है ये ड्यूटी दो प्रकार की होती है
- पक्की ड्यूटी
- खुली ड्यूटी
पक्की ड्यूटी :- पक्की ड्यूटी में अनुयायी पक्के तौर पर एक निश्चित समय पर अपनी सेवाएं डेरे को देता है।
खुली ड्यूटी :- जो व्यक्ति काफी व्यस्त होता है और जिसके पास अधिक समय नहीं होता वो डेरे में खुली ड्यूटी देता है अर्थात वो अपने समय के अनुसार एरिया सेक्रेटरी से बात करके अपनी ड्यूटी लगवाता है और डेरे को अपनी सेवाएं दे सकता है।
ये सेवा हर तरह से होती है जैसे सत्संग भवन की साफ सफाई, भवन निर्माण, लंगर के लिए खाना तयैर करना आदि, मतलब हर वो कार्य, जो एक डेरे को चलाने के लिए जरुरी होता है
डेरों की आय का साधन क्या होता है
डेरों की आय के कई साधन होते हैं जिनमे प्रमुख हैं
- भक्तों द्वारा दिया गया दान
- भक्तों द्वारा दान की गई सम्पति
- कुछ डेरे कृषि और व्यापार से ही आय अर्जित करते हैं
- कुछ डेरे अपनी धार्मिक पुस्तकें, पत्रिकाएं आदि प्रकाशित करते हैं और उनको बेचते हैं
- कुछ डेरे धार्मिक, सामाजिक और शैक्षिक सेवाएं भी उपलब्ध करवाते हैं।
नाम दान से डेरों के अनुयायियों की सटीक संख्या नहीं बताई जा सकती
नाम दान से भी अनुयायियों की सँख्या का सटीक अंदाजा नहीं लगाया जा सकता क्यूंकि कुछ लोग कुछ समय के बाद मोहभंग की स्थिति से गुजरते हैं और उन डेरों का त्याग करके किसी दूसरे डेरा समुदाय से नाम दान ले लेते हैं परन्तु उनका रिकॉर्ड उनके पुराने डेरे में भी पड़ा रहता है।
सिख धर्म में अमृत संस्कार कैसे किया जाता है पढ़ने के लिए क्लिक करें
One Response